हो गमो में इतनी चूर गयी.
चली मैं इतनी दूर गयी |
![]() |
| Add caption |
जिन्दगी की
हर सौगाते
सारे रिश्ते
सारे नाते,
धूमिल ऐसे
नूर हुए
पल भर में
हमसे दूर हुए,|
हो गमो में इतनी चूर गयी.
चली मैं इतनी दूर गयी|
तुम बिन सूना
हर पल मेरा
याद बहुत
करती कल तेरा.
देख त्रासदी
काया रोई .
देख मुझे ना
पाया कोई.|
हो गमो में इतनी चूर गयी.
चली मैं इतनी दूर गयी|
सोचती रहती थी
मैं जिनको
भूल गए सब.
आज हमीको
आया न कोई
पास में मेरे,
बस साया था
साथ में मेरे |
हो गमो में इतनी चूर गयी.
चली मैं इतनी दूर गयी |
इश दुनिया के
युद्ध क्षेत्र में.
हर योधा के
परम नेत्र में.
ऐसे नीर को
बहते देखा,
चला कोई हो
धीर गयी |
हो गमो में इतनी चूर गयी.
चली मैं इतनी दूर गयी |

No comments:
Post a Comment