मुस्लिम वोटों की भूखी तथाकथित सेकुलर पार्टियों और हिंदू संगठनों को पानी पी पी कर कोसने वाले मिशनरी स्कूलों से निकले अंग्रेजीदां पत्रकारों और समाचार चैनलों को उनकी याद भी नहीं आती |गुजरात दंगों में मरे साढ़े सात सौ मुस्लिमों के लिए जीनोसाईड जैसे शब्दों का प्रयोग करने वाले सेकुलर चिंतकों को अल्लाह के नाम पर क़त्ल किए गए दसियों हज़ार कश्मीरी हिंदुओं का ध्यान स्वप्न में भी नहीं आता | सरकार कहती है कि कश्मीरी हिंदू “स्वेच्छा से” कश्मीर छोड़ कर भागे | इस घटना को जनस्मृति से विस्मृत होने देने का षड़यंत्र भी रचा गया है | आज की पीढ़ी में कितने लोग उन विस्थापितों के दुःख को जानते हैं जो आज भी विस्थापित हैं | भोगने वाले भोग रहे हैं | जो जानते हैं, दुःख से उनकी छाती फटती है, और आँखें याद करके आंसुओं के समंदर में डूब जाती हैं और सर लज्जा से झुक जाता है | रामायण की देवी सीता को शरण देने वाली भारत की धरती से उसके अपने पुत्रों को भागना पड़ा |
कवि हरि ओम पवार ने इस दशा का वर्णन करते हुए जो लिखा, वही प्रत्येक जानकार की मनोदशा का प्रतिबिम्ब है -
“मन करता है फूल चढा दूँ लोकतंत्र की अर्थी पर,
भारत के बेटे शरणार्थी हो गए अपनी धरती पर” |
जागो हिन्दुओं …
और सेकुलरो … सालो… अगर थोड़ी भी शर्म बची हो तो डूब मरो चुल्लू भर पानी में.. अन्यथा कल को तुम्हे वो पानी भी नसीब नहीं होने वाला है…!
इसलिए …. फालतू की नौटंकी तथा झूठा भाई-चारा बंद करो और……. गर्व से कहो हम हिन्दू हैं…!
क्योंकि…. जो हो चूका है उसे लौटाया तो नहीं जा सकता है परन्तु…. जागरूक और एकजुट रहकर अपने वर्तमान में उसकी पुनरावृति को जरुर रोका जा सकता है और, अपने भविष्य को सुनहरा बनाया जा सकता है…..!!
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